ऋषिकेश; शातिर अंदाज में करते थे ठगी, कागज की गड्डी थमा असली रुपये ले जाते थे उड़ा; ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे

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देहरादून रोड स्थित यूनियन बैंक में तीन दिन पूर्व एक व्यापारी के कर्मचारी से 30 हजार रुपये की टप्पेबाजी करने वाले तीन आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 22 हजार रुपये नकद और अन्य सामान बरामद किया है।

तीन दिन पूर्व देहरादून रोड स्थित मनीष ट्रेंडिग कंपनी का कर्मचारी शिवा देहरादून रोड स्थित यूनियन बैंक में 30 हजार रुपये जमा कराने गया था। इस बीच दो लोग उसके पास पहुंचे उसे 50 हजार रुपये की नई गड्डी दिखाते हुए कहा कि उन्हें यह भुगतान किसी को देना है, यदि तुम्हें नए नोट चाहिए तो बदल सकते हो। कर्मचारी शिवा ने कहा कि उसके पास 30 हजार रुपये हैं उन दोनों ने उससे 30 हजार रुपये ले लिए और बदले में गड्डी उसे थमा दी। साथ ही उन्होंने कहा कि यह रकम वह समीप खड़े किसी व्यक्ति को देकर आ रहे हैं। उसके बाद वह शेष धनराशि ले लेंगे। इससे पहले कर्मचारी कुछ समझ पाता दोनों वहां से बाइक में सवार होकर चले गए। कुछ देर बाद जब यह दोनों वापस नहीं आए तो कर्मचारी ने गड्डी की जांच की तो उसमें कागज भरे थे।

तब उसे पता चला कि उसे ठग लिया गया है। इस मामले में पुलिस ने बैंक के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। बाहर खड़ी बाइक का नंबर भी ट्रेस किया गया, इंस्पेक्टर ऋषिकेश महेश जोशी ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने बुधवार को गोपाल नगर स्थित भूखंड से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। जिनमें शिव कुमार निवासी पालइया रोड, रेलवे पटरी के सामने, थाना डहग्राम जिला गांधीनगर गुजरात, हाल निवासी पुलिया के पास खंजरपुर, रुड़की, हरिद्वार, सुरेंद्र कुमार निवासी ग्राम बगेड़ी, थाना सिविल लाइन रुड़की, हरिद्वार, सोमनाथ निवासी ग्राम नगली मेहनाज, थाना नागल, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश व हाल निवासी खंजरपुर, रुड़की, हरिद्वार शामिल हैं। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि पीडि़त कर्मचारी को बुलाकर आरोपितों की शिनाख्त भी कराई गई। तीनों आरोपितों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

बुजुर्ग व छोटे बच्चों को बनाते हैं शिकार

पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपितों ने बताया कि वह बैंक के अंदर ऐसे व्यक्ति का चयन करते हैं जो छोटा लड़का या बुजुर्ग हो। उसके बाद उसे लालच देते हैं कि हम कहीं से पैसा चोरी करके लाए हैं। यदि वह हमें अपने खुले हुए पैसे दे दे तो हम उसे बंधे हुए कुछ अतिरिक्त पैसे दे सकते हैं। कभी-कभी हम खुले पैसे लेकर बंधे हुए पैसे देने का बहाना बना कर भी कागज की गड्डी थमा कर वहां से निकल जाते हैं। पुलिस के मुताबिक शातिर आरोपित पहले से ही कागज की दो-तीन गड्डी को रुमाल में बांध कर रखते हैं, और उसके ऊपर एक नोट असली वाला लगा देते हैं। जिससे सामने वाले को यकीन हो जाए कि यह पैसों की गड्डी है। आरोपित अपना एटीएम कार्ड, पासबुक, आधार कार्ड आदि भी अपने पास रख लेते हैं। ताकि बैंक के गार्ड या पुलिस को चेङ्क्षकग के दौरान स्वयं को लोकल का व्यक्ति बता सकें। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महेश जोशी ने बताया कि आरोपित शिवकुमार पूर्व में भी कोतवाली ऋषिकेश में इसी प्रकार की ठगी के आरोप में जेल जा चुका है।

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